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पावसाच्या धारा

पावसाच्या धारा
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पावसाच्या धारा
भन्नाट वारा
टपटप टपटप
पागोळ्या दारा

पोरं घरामध्ये
बसली अडकून
वीज कडाडे
ढगोबा धडकून
लख्ख प्रकाश
आकाश तडकून
पावसाचा तोरा
धिंगाणा सारा
पावसाच्या धारा

पाणी साठले
त्यात खेळू या
धबक धबक
ते उडवू या
पाण्यात होड्या
चला सोडू या
पाण्यात भोवरा
फिरे गरागरा
पावसाच्या धारा

तुडुंब पाणी
वाहते खळाळून
चालावे कसे ?
किती सांभाळुन ?
कागदाच्या होड्या
जाती गोंधळून
पावसाचा जोरा
तडमतडम नारा
पावसाच्या धारा

किती पडतो
कसा पडतो
कधी झरतो
कधी दडतो
कधी हळूच
कधी वाढतो
पावसाचा होरा
कळे ना पोरा
पावसाच्या धारा
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बिपीन सांगळे