प्रेमरस धारा
चन्द्रशेखर गोखले
सखे तुझे पायी, गळे अभिमान
इथेच निधान, कैवल्याचे
शब्दही निमाले, अश्रु ओघळले
हे कैसे उमाळे, अंतर्यामी..?
कारुण्य वात्सल्य, सखे तुझे प्रति
प्रिती की आसक्ती, ठाव नाही
एक मज ठाव, अंतरी जो भाव
त्याचे नाव गाव, पुसू नको
हृदयाची भाषा, न जाणे मस्तक
मौन मात्र एक, प्रकटन
असा ईश्वरीय , अनुभव सारा
प्रेमरस धारा, चिंब चिंब
एक नया अनुभव / हरिवंशराय
एक नया अनुभव / हरिवंशराय बच्चन
मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक
कविता लिखना चाहता हूँ।
चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों में
मेरे परों की रंगीनी है?'
मैंने कहा, 'नहीं'।
'तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?'
'नहीं।'
'तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?'
'नहीं।'
'जान है?'
'नहीं।'
'तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?'
मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'
चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'
एक अनुभव हुआ नया।
मैं मौन हो गया!
असा हा ईश्वरीय
एक सुचवणी :
ऐवजी
कसे वाटते? "हा" शब्द अर्थाच्या दृष्टीने फार महत्त्वाचा आहे काय? (मला तसा कळलेला नाही.)